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बुधवार, 9 मार्च 2011

दांडी मार्च -2

१२ मार्च १९३० को महात्मा गाँधी जी ने ऐतिहासिक डांडी मार्च शुरू किया था ,साबरमती आश्रम से लेकर समुद्र तट पर स्थित डांडी तक . २४० मील की इस यात्रा में गांधी जी के साथ सिर्फ करीब सत्तर से कुछ ज्यादा ही लोग थे पर डांडी पहुँचते पहुँचते लाखों का सैलाब बन गया यह अभियान .काले नमक  कानून को तोड़ हजारों ने नमक बनाया और देश दुनियां भर में यह अभियान करोड़ों की प्रेरणा बन गया ,साम्राज्यवाद के खिलाफ .

आज भारत की जो दशा है और भ्रस्टाचार को जिस तरह संस्थागत स्वरुप मिल गया है वह गांधी जी का ' रामराज ' नहीं वरन देशद्रोही ,जनद्रोहियों का ' हराम राज ' बन गया है .देश स्तब्ध तो है पर किंकर्तव्य विमूढ़ नहीं .विभिन्न मंचों से प्रतिकार में विरोध विद्रोह बन कर उभरा है .ऐसा ही एक मंच है ' INDIA AGAINST CORRUPTION ' या  ' भ्रस्टाचार के विरुद्ध जनयुद्ध .इसमें देश की नामी गिरामी हस्तियाँ शामिल हैं जैसे की प्रख्यात समाज सेवी अन्ना हजारे ,बाबा रामदेव ,किरण बेदी ,प्रशांत भूषण ,स्वामी अग्निवेश ,अरविन्द केजरीवाल ,श्री श्री रविशंकर ,जस्टिस संतोष हेगड़े आदि तथा कितने ही ख्यातनाम नागरिक ,हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख ईसाई का भेद मिटा कर ,एकजुट  हुए हैं .

इनमे शामिल प्रख्यात कानून विदों ने जिसमे पूर्व कानून मंत्री शांतिभूषण ,प्रशांत भूषण ,जस्टिस संतोष हेगड़े ने ' भ्रस्टाचार ' पर लगाम लगाने के लिए तथा शीघ्र सजा दिलाने के लिए ' जन लोकपाल बिल '  का प्रारूप तैयार किया है .यह तब किया गया जब सरकार द्वारा लाये जाने वाले ' लोकपाल ' की भनक मिली जिसके तहत जनता को बेवकूफ बनाने की एक तिकड़म से कि ' कुछ किया जा रहा है '  , एक ऐसा बिल लाने  की योजना थी कि वर्तमान व्यवस्था में भी जो खामियां थीं वे तो बरक़रार रहती हीं ऊपर से उसमे प्रतिरोपित कानूनी चक्रव्यूह में आज भी जो धीमी गति है वह और भी  धीमी हो जातीं और एक तरह से भ्रष्टाचार को अतिरिक्त सहारा मिलता और छूटने के मौके और बढ़ जाते .

इस मंच के अन्ना हजारे ने ५ अप्रेल को ' जन लोकपाल बिल ' पास कराने के लिए आमरण उपवास की घोषणा की .सरकार ने घबराकर बातचीत करने के लिए मंच के ८ सदस्यों को ७ मार्च को आमंत्रित किया .लेकिन मई के अंत तक कुछ न कर पाने की असमर्थता बताई क्योंकि सरकार ' व्यस्त ' है. जाहिर है कि कई राज्यों के चुनाओं में सरकार घबराई हुयी है और मामले को तब तक लटका कर ठंढा कर देने के मंसूबे संजो रही है .अन्ना हजारे जी ने अपने उपवास के फैसले पर अटल रहने का निर्णय लिया है तथा अपने फैसले को अटल बताया .यद्यपि मीडिया काफी चुप्पी साध हमेशा की तरह ही छिपाने में ही लगा है लेकिन संचार युग के नेट्वर्किंग हथियार के सहारे दुनिया भर के सजग भारतीयों को एक कर रहा है .

अमेरिका यूरोप सहित विश्व भर में और भारत में भी  भारतीय कई जगह डांडी मार्च-२ का आयोजन कर रहे हैं और हजारों की संख्या में खुद को शामिल कर रहे हैं .

यह मेरा सौभाग्य है कि साबरमती से दांडी तक महात्मा के ८१ साल पहले के  पद चिन्हों पर चलने के इरादे और इस संघर्ष का बिगुल बजाते  मैं भी दांडी -२ मार्च में शामिल हो रहा हूँ ' जन लोक पाल बिल ' लिए . डांडी मार्च-२ भी , ८१ साल बाद ,उसी वक्त ,१२ मार्च को शुरू होगा और जैसे जैसे जिस पथ पर गांधी जी चले थे वही पथ होगा वही विराम स्थल और वही मंजिल .

हम भी नमक बनायेंगे . और वह नमक  छोटी छोटी पुड़ीयों में देश के हर लोकसभा ,राज्यसभा ,विधानसभा के सदस्यों ,न्यायाधीशों ,नौकरशाहों राष्ट्रपति वगैरह के साथ ही तमाम बड़े पूंजीपतियों को भेजा जायेगा कि इसे जरूर खाएं और उस महात्मा के नाम और उसके नमक की कसम ले कहें कि देश से ' नमक हरामी ' नहीं करेंगे .

बापू के ' रामराज ' को आना ही होगा और हरामियों के ' हराम राज ' को जाना ही होगा !  

जय हिंद !    `           









3 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

रामराज आना ही होगा।

राज भाटिय़ा ने कहा…

राम राज के लिये कोई राम सा भी चाहिये, हो सकता हे यह काम राम देव ही कर दे..जय हिंद !

P.N. Subramanian ने कहा…

' रामराज ' को आना ही होगा और हरामियों के ' हराम राज ' को जाना ही होगा.काश मै भी आपके साथ जाता.