आदरणीय डा . सुब्रमण्यम स्वामी जी ,
मैं आपके कार्य ,व्यक्तित्व ,निष्ठा ,राष्ट्र प्रेम ,विद्वता ,सतत संघर्ष और समर्पित देश हित का परम प्रशंसक रहा हूँ .मुंबई में 5 फरवरी 2012 के ' मनीलायिफ ' द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मैं महीनों पहले रेजिस्ट्रेसन करा हाजिर हुआ .हमेशा की तरह आपके वक्तव्य से इस बार भी दिशा ,ज्ञान ,राजनैतिक घटनाक्रम और खास कर 2G विषय पर विशेस जानकारी के द्वारा अपनी जानकारी बढ़ायी .आपको सुनना हमेशा एक अनुभव रहा और करीब बीस साल पहले न्यू योर्क में आपसे व्यक्तिगत संपर्क होने पर आपके व्यक्तित्व की विशालता का प्रशंसक भी .कुछ एक साधारण मुद्दों को छोड़ ( पूर्णतः सिर्फ दो मूर्ख ही हमेशा एकमत हो सकते हैं :) ) ,आपकी राजनितिक राष्ट्रीय विचार और राजनीती और ध्येय की स्पष्टवादिता का मैं समर्थक रहा हूँ .जनता दल ( यू ) मुंबई का अध्यक्ष भी हूँ , यह मान कर कि अगर अच्छे लोग राजनीती में नहीं आयेंगे तो राजनीती बदमाशों की ही गुलाम बनी रहेगी .
उस सभा में जब आपके बाद IAC के मयंक गाँधी को सह वक्ता पाया तो घोर आश्चर्य हुआ .आप भी पहले कह चुके हैं की अन्नाजी आदरणीय हैं लेकिन अन्नाजी सहित कुछ अपवादों को छोड़ बाकी IAC की ' टीम अन्ना नक्सलियों का झुण्ड ' है , और काश्मिरी अलगाववादियों आतंकियों की समर्थक जो कश्मीर को थाली में प्रस्तुत कर पाकिस्तान को दे देना चाहती है . मेरा भी यही निष्कर्स है . प्रशांत भूषन जैसे लोगों ने कोई शंका की गुन्जयिस भी नहीं छोडी है .
IAC से शुरुवात से ही जुड़ा होने के कारण जब इन गद्दार और भ्रष्ट तथाकथित नेताओं ( टीम अन्ना ) का भ्रष्टाचार के खिलाफ ' मुखौटा ' लगा उनका असली कुत्सित उद्देस समझा तो विरोध भी किया .जैसे की फरवरी 2011 की मुंबई में काला घोडा की IAC की आयोजित सभा ,जिसकी अध्यक्षता मयंक गाँधी कर रहे थे तथा अरविन्द केजरीवाल मुख्य वक्ता .अपने भाषण में केजरीवाल ने जन लोकपाल पर कम डा. विनायक सेन ( नक्सल गतिविधियों में संलिप्तता के चलते जिन्हें आजीवन कारावास मिला था ) की जोरदार वकालत कर रहे थे और एक संवैधानिक अदालत द्वारा दी गयी सजा को पाप बता रहे थे ,ये तो संविधान की अवमानना के अपराधी हुए .साथ ही बिहार के मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार द्वारा सरकारी कर्मचारियों की आय से अधिक संपत्ति पाए जाने पर संपत्ति की जब्ती कर, उसे जन कार्यों के उपयोग के लिए ,जैसे स्कूल अस्पताल वगैरह के लिए , इस्तेमाल को काला जालिमाना द्रकोनियन कानून बता रहे थे .मैंने विरोध किया की IAC के मंच का उपयोग सिर्फ भ्रष्टाचार के विरुद्ध लाये जाने वाले मुद्दों तक ही सिमित रहे ,भले हमारे व्यक्तिगत विचार कुछ भी हों .साथ ही यह भी कहा की स्वयं अन्नाजी ऐसे कानून लाने का पुरजोर समर्थन करते हैं तथा नितीश जी की प्रशंसा भी की है इसके लिए तो आप उनके स्टैंड के खिलाफ IAC के मंच से ही ऐसी बातें करने की हिम्मत कैसे कर रहे हैं . मयंक गांधी जो केजरीवाल के खासमखास हैं ( नियुक्त ,चुने नहीं . क्योंकि IAC में कोई आतंरिक लोकतंत्र नहीं है और उसे इन लोगों ने अपनी जेब में रखा है ) ने मुझे चुप कराने की कोशिस की लेकिन मैंने दृढ़ता से केजरीवाल से कहा की अपने मुद्दों के लिए वे IAC का इस्तेमाल नहीं कर सकते और सीमा में ही बोलें .वे संभल गए फिर उन मुद्दों पर कुछ नहीं कहा .
स्वयं मयंक गाँधी भी जब अपनी जिस पारिवारिक लिस्टेड बिल्डर कंपनी के डाईरेक्टर थे ,उस पर ग्राहकों को ठगने का खुला आरोप है और आज भी उसने लिखित आश्वासन के बाद भी अपने अनगिनत ग्राहकों को फ्लैट देना तो दूर पैसा भी नहीं लौटाया है .स्वयं मयंक गाँधी ने इसे अपने ब्लॉग पे लिखा और यह भी लिखा की इस बात की जानकारी वे अरविन्द केजरीवाल को दे चुके हैं और इसके बावजूद केजरीवाल ने उन्हें मुंबई के IAC के नेत्रित्व पर बना रहने के लिए कहा है .ये बात दूसरी है की अपने चमचों के अलावा तीखी प्रतिक्रियाएं आने पर उन्होंने जल्दी ही वह पोस्ट निकाल दी .( फोटो कापी उपलब्ध है ) इसीलिये आपके मंच से जब मैंने मयंक गाँधी को ' सम्माननीय सहवक्ता ' पाया तो अपना ऐतराज व्यक्त किया बुलंदी से , आपको ही संबोधित कर,आयोजकों के विरोध के बावजूद भी . क्योंकि ऐसे लोगों की ' सम्माननीय उपस्थति ' और उनके द्वारा ,जो IAC के मुखौटे में मुंबई के बिल्डर लोब्बी के चेहरे और दलाल हैं , उनसे आपको पवित्र राष्ट्र ध्वज समर्पित किया जा रहा था .
डा. स्वामी जी मैं सपने में भी आपका अनादर नहीं कर सकता और आज की राजनीती में मेरे लिए आप सब से बड़े और एक सम्माननीय ' चेहरा ' हैं .अतः आप से निवेदन है कि किसी भी हालत में , आप मेरे इस कर्तव्य को अपनी सभा का अनादर न मानें न ही आप इसे सभा बाधित करने या व्यवधान करने की कोशिश ही समझें .( इसी को आधार बना मुझे IAC मुंबई से निकाल दिया गया है . लेकिन कर्तव्य मुझे ऐसी किसी सदस्यता से ज्यादा महत्वपूर्ण है . वैसे भी समझदार जानकार लोग खुद IAC से अलग हो गए हैं या मेरे जैसे विरोध करने वाले निकाल दिए गए हैं . बहुत कुछ अच्छे देश भक्त अभी भी हैं लेकिन कुंठित और निराश ) .अगर आप को या किसी को भी ऐसा लगा हो कि मैंने कुछ गलत किया है तो मैं उसके लिए क्षमा और आपकी माफी का हक़दार माना जाऊं ,यह निवेदन है .क्योंकि इरादा सिर्फ यह था की आज की राजनीती के सब से सम्मानित व्यक्तित्व की शान न कम होने पाए .
आपने ONE MAN ARMY की हैसियत से इस राष्ट्र को जो ऐतिहासिक विजय दिलाई है वह असंभव से संभव कर पाना आप के अथक , निरंतर संघर्ष के बिना संभव ही न हो पाता . यह राष्ट्र अपने इस ' राष्ट्र पुत्र ' पर अभिमान कर रहा है और इस देश की जनता आपकी सिर्फ चिर रिणी ही नहीं रहेगी आपमें एक सेनापति भी देख रही है .आपके साथ इस देश को आना ही होगा .लेकिन गद्दारों और सत्ता के दलालों से सावधान रहें क्योंकि इन लोगों ने अन्नाजी के आन्दोलन का अपहरण कर, देश के क्रोधित भ्रष्टाचार के खिलाफ उभार को , लगातार थका कर और फिर अपने असली चेहरे की पहचान दे ठंढा कर दिया और आज का युवा विभ्रमित है , की क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले ये चेहरे असली हैं ? तमाम सच्चे लोग इन्हें पहचान घरों को लौट गए हैं . IAC के नाम पर चंदा उगाही कर अपने निजी NGO खातों डाल रखा है इन्होने और हिसाब मांगने वालों की पिटाई भी की है . कुछ लोगों की टिप्पणी थी की ' खाता न बही ,केजरीवाल कहे वो सही ' . इस आन्दोलन को और स्वयं अन्ना जी को इन धूर्तों ने सुनियोजित तरीके से अवसाद ग्रस्त कर डाला है .
वैसे आपकी बुद्धि और विवेक पर मुझे पूरा भरोसा है कि ये लोग आपका ' उपयोग ' नहीं कर पायेंगे क्योंकि आप ' भोले अन्ना ' नहीं है .जानता हूँ कि राजनीती में विजय के लिए समझौते भी करने पड़ते हैं .लेकिन मैं आपमें प्रसिद्द अमेरिकी राष्ट्रपति FDR की बुद्धिमत्ता भी जानता हूँ कि आप इनका इस्तेमाल कर रहे होंगे ये आपका नहीं कर पायेंगे .आपसे ज्यादा कौन जानता है कि अप्रैल २०११ के ' जंतर मंतर ' पर हुए अन्नाजी के पहले उपोषण पर इन्हीं ताकतों ने सत्ता का ' क्षद्म दलाल ' बन आप जैसे देश भक्तों को आने भी नहीं दिया था शामिल होने .
आपसे निवेदन है की 30 जनवरी 2011 के दिन दिल्ली के रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के खिलाफ लाखों की जनता और इकट्ठी हुयी सभी ताकतों को एकजुट कर , आप इस राष्ट्र के इतिहास के ' महानतम ' युद्ध को जीत में बदल डालें और देश भ्रष्टाचार से मुक्त ,सुशासित ,और जैसे ' महर्षि ' कलाम ने अपनी किताब...... ' INDIA VISION -2020 ' में , देश को एक सपना दिया है ,यह देश ' सारे जहाँ से अच्छा ' बने .
आपको यह याद दिलाने की जरूरत नहीं की वही ' सत्ता की दलाल गद्दार ताकतें ' आप के होते फिर से किसी जन आन्दोलन को तोड़ न सकें और ' लुटेरों ' के खिलाफ अब जो लडाई हो वह निर्णायक हो .
A FINAL WAR !
देश सहित आपका चिर रिणी
राजकुमार सिंह



